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कुछ रंग दुनिया के Kuchh Rang Duniya Ke

कुछ कहना और कुछ करना दुनिया की यही कहानी है मन के अन्दर मैल भरा पर मीठी बहुत जुबानी है वादा करता जो कल का वो लम्बा समय बिताता है उधार ले गए सामान को वो जल्दी नही ं लौटाता है दिया हुआ सामान न मांगा फिर वापस नहीं आता है बहुत दिनों के बाद जो मांगा कितनी बात बताता है किसी से सम्बन्ध बिगाड़ो तो उसको पैसे देना तुम जिस दिन तुमने मांग लिए उसके दुश्मन बन गए तुम आपस की राम राम भी फिर बन्द हो जाती है उसको तुम्हारी सूरत भी बिल्कुल नहीं भाती है मतलब से ही प्रीत है जुड़ती बिन मतलब नहीं होती है बिन मतलब के राम राम भी आज बहुत कम होती है पैसे के पीछे भागा आदमी उसे रिश्ता नहीं दिखता है पैसे के खातिर गलत काम करने में नहीं हिचकता है जिससे उसका काम निकलता वो उसका अपना होता बिना काम के असली रिश्ता भी उसको नकली होता करें बहाना समय नहीं था काम पड़ा तो कहाँ से आया मतलब खातिर दौड़ लगाई खाना पीना कुछ नहीं भाया मीठा बोलकर काम निकालना लोगों को खूब आता है काम निकल जाने के बाद वही आदमी नहीं भाता है दूसरों का दर्द न समझे ं अपना दर्द गिनाते हैं किसी को दिल का दर्द बता दो खूब हंसी बनाते हैं अपना नुकसान इन्हें ...

ग़ज़ल Gazal

हम जियें तो दूसरों के लिए और मरें तो दूसरों के लिए रास्ता जब भी हो मुश्किल हम चलें तो दूसरों के लिए जब भी दुख हो किसी को भी हम रोये ं तो दूसरों के लिए माहौल जब भी खुशी का हो हम हंसें तो दूसरों के लिए जिंदगी में जो भी किया हमने वो रहे तो दूसरों के लिए

दिवाली फिर आई Diwali fir Aaee

वर्षा ऋतु का अन्त हुआ जब आना जाना सरल हुआ तब इधर उधर जब देखा जाकर गन्दे दिए दिखाई सब घर घरों की सबने करी पुताई दिवाली फिर आई विजनेस मैन दुआ मनाये ंं दीपावली जल्दी से आये दूकानों को खूब सजाकर  ज्यादा सा सामान बेचकर  हम भी कर लें खूब कमाई दिवाली फिर आई कुछ शौकीन जुआ के भाई उनने अपनी किस्मत अजमाई कहें जुआ खेले दिलवाला कुछ का तो हो गया दिवाला इस बार लक्ष्मी हुईं पराई दिवाली फिर आई तरह तरह के पकवान बनाये सबने मिलकर खूब है ं खाये पूड़ी, गुजिया और कचौड़ी कुछ को रुचिकर लगीं पकौड़ी पीने वालों ने नहीं खाई मिठाई दिवाली फिर आई फोड़े ं पटाखे मौज मनाये ं प्रदूषण को बहुत बढ़ाये ं  खतरा इनसे होता भारी बच्चों की मति गयी है मारी दुर्घटना हो सकती भाई दिवाली फिर आई जगमग जगमग दीप जल रहे तारों जैसे ये खिल रहे अवली इनकी दिखतीं प्यारी सुन्दर लगती ं न्यारी न्यारी लगता उजियारा ले आईं दिवाली फिर आई श्रीराम वनवास से आये सीता, लखन साथ में आये अयोध्यावासी खुशी न समाये सबने घी के दीप जलाये तब से प्रतिवर्ष दिवाली मनाई दिवाली फिर आई

ग़ज़ल GAZAL

मैं जो कहता हूँ उसे निभाता हूँ मेरे मन में जो है उसे सुनाता हूँ कविता भले ही हो कल्पना मेरी फिर भी मैं सच के करीब जाता हूँ चाहे लोग कुछ भी समझें मुझको पर मैं कहने में न हिचकिचाता हूँ देखता हूँ जब भी कुदरत की रचना को न जाने क्यों  मन ही मन मुस्कराता हूँ सबको समझ लिया है अब अपना मैंने तब ही तो हर किसी का गम बंटाता हूँ

क्या अच्छा और क्या बुरा | Kya Achchha Aur Kya Bura

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दीना एक छोटे से गाँव में रहता था. गाँव छोटा तो था ही और इसमें सुख सुविधा नाम की कोई चीज नही ं थी. गाँव में रास्ते कच्चे ही थे. वर्षा ऋतु में तो गाँव में किसी के घर से किसी दूसरे के घर जाना भी बड़ा मुश्किल होता था. बाद में कुछ रास्तों में खड़ंजा पड़ गया था. गाँव में बिजली भी अभी नहीं आई थी. गाँव में एक शिव मंदिर और एक प्राइमरी स्कूल था. दीना की शिक्षा इसी प्राइमरी स्कूल में कक्षा पांच तक ही हो पाई. गरीबी के कारण उसके पिता शिक्षा के लिए उसे और कहीं नहीं भेज पाए थे. दीना के पिता कृषि कार्य करते थे. दीना भी अपने पिता के कार्य में हाथ बंटाता था. दीना अभी छोटा ही था किन्तु अपने पिता के खेत को जाते समय सदा उनके साथ जाता था. दीना के पिता  जिस दिन सुबह का नाश्ता  किए बिना ही खेत को चले जाते तो दीना ही नाश्ता लेकर खेत को जाता था. धीरे धीरे दीना कुछ बड़ा हो गया.अब रिश्तेदार दीना के पिता से दीना का विवाह करने को कहने लगे. रिश्तेदारों का ज्यादा दबाव पड़ने के कारण दीना का विवाह कम उम्र में ही कर दिया गया. दीना का विवाह एक धनदेई नाम की अनपढ़ लड़की से हुआ. इसका कारण यह रहा कि उस समय लड़क...

सिमटती धरती- बढ़ती दूरियां | Simatee Dhartee-Barhtee Dooriyaan

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भारत एक कृषि प्रधान देश है. यहाँ की लगभग सत्तर प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य करती है.कृषि करने के लिए जमीन की आवश्यकता होती है. देश की जनसंख्या में निरंतर वृद्धि के कारण खेतों का आकार दिन प्रतिदिन छोटा होता जा रहा है. इसके अतिरिक्त बढ़ती जनसंख्या के लिए अन्य सुविधाओं हेतु भी भूमि का उपयोग किया जा रहा है इस कारण से कृषि योग्य भूमि दिनों दिन घटती जा रही है. इनमें प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं. बेरोजगारी वर्तमान समय की एक प्रमुख समस्या है. कृषि कार्य में लगे लोगों को भी वर्ष भर कार्य नहीं मिलता है. कृषि कार्य में कुछ लोग ऐसे भी लगे रहते कि जिनको हटा देने से भी उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. इस प्रकार के कार्य में लगे लोग भी बेरोजगार कहलाते हैं, इस प्रकार की बेरोजगारी  प्रछन्न बेेेरोजगारी कहलाती है. बेरोजगारी का एक अन्य प्रकार शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवक एवं युवतियों का है.इन युवाओं के लिए भी रोजगार देने का दायित्व भी सरकार का ही बनता है. सरकार द्वारा जो रोजगार की व्यवस्था की जाती है वो बेरोजगारों की तुलना में काफी कम होती है. बेरोजगारी केवल सरकारी नौकरियों से दूर नहीं हो पा रही है,...

कुछ लोग ऐसे भी Kuchh Log Aise Bhi Hindi Poem

बन्दे तेरे धन्धे कैसे कुछ आज समझ नही ं आता है आए दिन कितना झूठ बोले  तू तनिक नहीं शर्माता है चिकनी चुपड़ी बातें करके तू सबको खूब लुभाता है अपना उल्लू सीधा करने को धोखे का जाल बिछाता है पल्ले में नहीं कुछ भी तेरे पर झूठी शान दिखाता है दूसरों से मांगी हुई चीज को अपनी चीज बताता है जाल में फँसे तेरे कोई चिड़िया फिर खूब तू हर्षाता है अगले कुछ दिनों का खर्चा आराम से चल जाता है ऐसा इंसान सुनो भाई जीवन में कुछ नहीं कर पाता है बस अपना और अपने कुल का नाम ही खूब डुबाता है

ग़ज़ल Gazal

मुझे छोड़ कर तुम कहाँ जा रहे हो कहो तो सही क्यों न कह पा रहे हो पूंँछा जो मैंने तो कुछ न बताया फिर मन ही मन क्यों मुस्करा रहे हो कितने दिनों से बैठा हूँ इसमें कि कब आ रहे और क्या ला रहे हो बड़े ही अजीब बन गए हो अब तुम जो भी लाए हो उसे खुद खा रहे हो न जाने क्या मैंने देखा है तुम में जो रुख न मिलाते फिर क्यों भा रहे हो 

ग़ज़ल Gazal

कोई न हो जब करीब तब तुम मिला करो छोड़ो वो पिछली बातें अब न गिला  करो देखो ये दुश्मनों ने कितने दिए हैं जख्म अब तुम ही आ करके इनको सिला करो आई जो तुम तो आ जाए बहार फिर मेरी भी कुछ बात तुम मान लिया करो पतझड़ करीब हो ये लगता है मुझको गम दूर रहे हमसे तुम ऐसी खिला करो मिलना हो जब हमें ये सोचे रहना तुम तुम सुई हो मैं धागा तुम न हिला करो                                              

बाल विवाह पर कविता Poem On Early Marriage In Hindi

लड़की और लड़के की उम्र हो इक्कीस वर्ष से कम विवाह हो सम्पन्न कहलाता है बाल विवाह माता पिता अपनी जिम्मेदारी से छुटकारा पाने हेतु अथवा लड़की, लड़के का व्यवहार देखकर बदनामी से बचने के लिए कर देते विवाह शीघ्र अपने किशोर अथवा किशोरी का मजबूरी वश कम उम्र में इस विवाह के कारण इनका जीवन हो जाता  अंधकारमय आता शिक्षा  में व्यवधान अपूर्ण शारीरिक विकास अपरिपक्व विचार कमजोर संतान अधिक संतानोत्पत्ति स्वास्थ्य में गिरावट निम्न जीवन स्तर गरीबी आदि आती ं समस्याएं जीवन में बाल विवाह सामाजिक कुप्रथा का विरोध करें इसके दोषों को समझाएं सभी को विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाल विवाह के दोषों से संबंधित नाटकों का मंचन करवाये ं किशोर तथा किशोरियों की भावनाओं को उनके माता पिता समझे ंं मित्रवत व्यवहार करें उनसे कम उम्र में विवाह के दोष बताएं इस कुप्रथा के दूर होने पर होगा स्वस्थ समाज एवं विकसित राष्ट्र                

तितलियाँ मुझको भाती हैं Poem On Butterfly In Hindi

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सुन्दर देख बगीचा मेरा तितलियों ने डाला डेरा विविध प्रकार के फूल खिल रहे इन पर मंडराती हैं तितलियाँ मुझको भाती हैं खिले फूल सदा इन्हें लुभाते फूल अधखिले इन्हें न भाते खिले हुए फूलों का रस ये लेते नहीं अघाती हैं तितलियाँ मुझको भाती हैं फूलों का रस चूसती तितली बेसुध होकर कभी न फिसली फूलों का रस चूस-चूस कर मन में  हरषाती हैं तितलियाँ मुझको भाती हैं चंचलता है स्वभाव इनका फूल नहीं कोई इनके मनका  उड़ती फिरती ंइधर उधर ये फूलों पर इतराती हैं तितलियाँ मुझको भाती हैं रंग बिरंगे पंख हैं इनके खुली धूप में खूब ये चमके पंखों को ये तेज हिलाकर दूर बहुत उड़ जाती हैं तितलियाँ मुझको भाती हैं एक बार हाथ आ गयी तितली उसके पंख से चमक जो निकली बहुत समय बीत जाने पर भी  वो याद मुझे आती है तितलियाँ मुझको भाती हैं

गुब्बारे का गुबार POEM ON BALLOON IN HINDI

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रंग रूप का हूँ मैं प्यारा बच्चों की आँखों का तारा हीलियम गैस मुझे सुहाती आसमान की सैर कराती बात बताऊँ तुमको हंँसके पकड़े रहना मुझको कसके छूट गया फिर हाथ न आऊंँ आसमान में मैं उड़ जाऊँ बच्चों के साथ मैं भी खेलता इधर उधर मैं उड़ता फिरता बच्चे मेरा ख्याल बहुत रखते दूसरों को तभी छूने नहीं देते फूटने से वो मुझे बचाते फूट गया तो वो रो जाते बच्चे मुझको लगते अच्छे होते हैं वो मन के सच्चे बच्चों का जन्मदिन जब आता मैं भी खुशियाँ   खूब मनाता सदा दोस्ती तुमसे मैं रखता इसलिए एक शिकायत करता मुझे फोड़कर खुशी मनाते बिल्कुल न तुम हो पछताते मैं मतलब का दोस्त तुम्हारा जान गया अब यह जग सारा

स्वास्थ्य-महत्व एवं रक्षा Health-Importance and sanitation

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जीवन में स्वास्थ्य का कितना महत्व कोई अस्वस्थ, दिव्यांग व्यक्ति ही कर  सकता है व्यक्त फिर भी इतना तो स्पष्ट एक अस्वस्थ व्यक्ति कोई भी कार्य ठीक से कर सकता नहीं परिणामस्वरूप स्पष्ट है विचार अच्छे स्वास्थ्य के बिना जीवन में है अंधकार अच्छे स्वास्थ्य के लक्षण समझें चिकित्सक ही लेकिन फिर भी  ऐसी है अभिव्यक्ति शरीर के सभी अवयव स्वभाविक रूप से क्रियाशील हों कार्य में लगे मन थकान न महसूस हो शीघ्र व्यक्ति की कार्यक्षमता पर न लगे प्रश्नचिह्न तो ऐसा व्यक्ति कहा जा सकता है स्वस्थ स्वास्थ्य रक्षा कैसे हो?  समस्या है जटिल तो क्यों न चिंतन एवं मनन करें, समस्या पर जीवन का प्रारंभ होता गर्भ में ही अत:वैवाहिक जीवन में पति पत्नी के सम्बन्ध मधुर स्वास्थ्य एवं विचार हों अच्छे गर्भ धारण के बाद माँ, स्वास्थ्य परीक्षण कराए चिकित्सक से परामर्श कर औषधि ले संतुलित आहार खाए प्रसव के पश्चात नवजात शिशु को माँ अपना ही दूध पिलाए समय पर शिशु का हो टीकाकरण अति घनिष्ठ सम्बन्ध है शिक्षा और स्वास्थ्य का बालक की शिक्षा हेतु बालक को प्रवेश दिलाएं  अच्छे विद्यालय में समुचित ध्यान दें खेल पर स्वास्थ्य की ज...

मंदी (रिसेंशन) Recession

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अर्थतंत्र के दो पहलू माँग एवं पूर्ति संतुलित हो करते मूल्य निर्धारण देते गति अर्थव्यवस्था को आर्थिक मुनाफा कमाने हेतु कम्पनियां करतीं अधिक उत्पादन वस्तु की लागत कम करने के लिए फलस्वरूप पूर्ति हो जाती अधिक माँग की तुलना में पूर्ति की अधिकता से आ जाती मंदी अर्थव्यवस्था में मंदी कर देती चौपट व्यक्ति, समाज, देश एवं विश्व को इससे होती विकास की गति धीमी बढ़ती बेरोजगारी नीचा होता जीवन स्तर कृषि एवं उद्योग चौपट होते इसके प्रभाव से जन जीवन होता अस्त व्यस्त मंदी दूर करने  हेतु किये जायें प्रयास ऋण उपलब्ध कराया जाए कम ब्याज दर पर संरक्षण दिया जाए उद्योग धंधों को व्यापार को मिले प्रोत्साहन सुधार हो वस्तुओं तथा सेवाओं की गुणवत्ता में संतुलन हो माँग एवं पूर्ति में दूर होगी मंदी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे सुधरेगी अर्थव्यवस्था

गर्मी पर कविता | Poem on Summer Season in Hindi

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गर्मी ने हैं जुलम गुजारे कपड़े भी अब लगें न प्यारे आए पसीना भीगें कपड़े सूख गए तो लगते अकड़े गर्मी से जब मन घबराता बाहर भीतर चैन न आता छत ऊपर से तपती भारी पंखे की हवा लगे न प्यारी  बिस्तर भी गर्मी से गरमाया बिन बिस्तर के सोना भाया  खाना पकाना भी है मुश्किल रसोई में न रहा जाए बिल्कुल नल का पानी अमृत जैसा खूब पियो कुछ लगे न पैसा गर्मी में हम खूब नहाएं जल को व्यर्थ कभी न बहाएं धन्य हमारे कृषक भाई गर्मी में भी करें जुताई टप-टप गिरे पसीना उनका मानो जल गिरता वर्षा का गरीबों को लगती गर्मी सर्दी धनवानों की चलती मनमर्जी गर्मी में वे  A C को चलाते सर्दी में वे हीटर को जलाते फ्रिज और  A C गर्मी बढ़ाते गर्मी का दुख हम सब पाते जीव जन्तु सब गए अकुलाए सोचें कैसे गर्मी जाए वृक्ष लगें गर्मी में प्यारे गर्मी के संकट से उबारें वृक्ष समान न कोई हितकारी काटा वृक्ष गयी मति मारी

समाज में परिवर्तन | Change in Society | Blog

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परिवर्तन प्रकृति का आवश्यक नियम है. प्रकृति में सदा कोई न कोई परिवर्तन होता ही रहता है. कोई भी परिवर्तन यकायक नहीं हो जाता है वरन् इसमें काफी समय लग जाता है. परिवर्तन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. कुछ परिवर्तन कम समय में हो जाते हैं जबकि कुछ परिवर्तनों में तो बहुत अधिक समय लग जाता है. प्रकृति की तरह ही मानव जीवन में भी परिवर्तन होता है. जिस प्रकार ऋतुओं में जाड़ा, गर्मी और बरसात आती है उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी बचपन, जवानी और फिर बुढ़ापा आ जाता है. मनुष्य के जीवन के तरह ही समाज में भी परिवर्तन होता है, इसे सामाजिक परिवर्तन कहा जाता है. कोई भी सामाजिक व्यवस्था जो समाज में काफ़ी समय से चली आ रही है उसे गलत तो नहीं कहा जा सकता है. इसके बारे में इतना ही कहा जा सकता है कि प्रचलित सामाजिक व्यवस्था समयानुकूल नहीं है, इसमें सुधार की आवश्यकता है. वर्तमान भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण इस ओर एक सराहनीय कदम है. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , सरकार की एक अच्छी योजना है. समाज में लिंगानुपात में असंतुलन एक गंभीर समस्या है. समय पर इसपर  ध्यान नही ं दिया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सक...

तना-तनी Tanaa-Tanee

प्रेमी और प्रेमिका में गरमा-गरमी हो गई किसी बात को लेकर दोनों स्मार्ट थे गर्व था दोनों को अपने डील-डौल पर गरमा -गरमी बढ़ती गई प्रेमी बौखला उठा बोला- मेरे पास बहुत लंबी तेज धार वाली तलवार है पता है तुम्हें प्रेमिका भी क्यों चुप रहती उसने कहा जी हाँ  पता है उस तलवार को  जिस म्यान में रखते हो वो तो मेरे ही पास है

नोंक-झोंक Nonk-Jhonk

एक बार छिड़ गयी बहस पति और पत्नी में पति ने पत्नी से कहा तुम्हें न खाना पकाना आता और न ही कपड़े पहनना कोई खाना, बाना ठीक नहीं है तुम्हारा कहाँ से सीखा ये सब कुछ पत्नी बोली तुमने अपने बारे में भी सोचा है कभी अपने काम-क्रीड़ा को लीजिए कैच लेने में उंगलियाँ दुखती हैं फील्ड में गये नहीं कि उल्टी शुरू कोई सैटिंग, बैटिंग नहीं विकेट भी जल्दी गिरता है तुम्हारा शुक्र है पड़ोसी का जो घर परिवार चल रहा है तुम्हारे भरोसे रहती फिर तो आज कुछ भी न होता

पर उपदेश कुशल बहुतेरे | Example is better than precept

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व्यक्ति को अपने, समाज और देश के विकास के लिए स्वयं को सुधारने की आवश्यकता है, दूसरों को उपदेश देने से काम नहीं चलेगा. दूसरों को उपदेश देने की परम्परा पहले से ही चली आ रही है. गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी इस सम्बन्ध में रामचरितमानस  में लिखा है- पर उपदेश कुशल बहुतेरे  अर्थात दूसरों को उपदेश देने वाले लोगों की संख्या समाज में बहुत अधिक होती है. अब प्रश्न यह उठता है कि केवल दूसरों को अपना सुझाव दें और स्वयं उस बात पर अमल न करें तो क्या इच्छित कार्य सम्पन्न हो सकता है? मेरे विचार से ऐसा सम्भव नहीं है. इस संदर्भ में एक लघु कथा आपके साथ साझा कर रहा हूँ जिससे यह विचार आसानी से स्पष्ट हो जाएगा.  एक राजा था. राजा के मन में एक उत्तम विचार आया. राजा ने सोचा कि उसके और अन्य राजाओं के राज्य में भी पानी के तालाब सर्वत्र दिखाई देते हैं किन्तु उसने दूध का तालाब कहीं नहीं देखा है. यदि मैंने अपने राज्य में एक दूध का तालाब बनवा दिया तो मेरा यश दूर दूर तक फैल जाएगा और मैं अद्वितीय राजा हो जाऊँगा. ऐसा विचार कर उसने कुशल कारीगरों से एक सुंदर तालाब बनबाया. संध्या के समय अपने सम्पूर्ण  राज्य ...

टीवी और बीवी - TV and Beevi

क्या जमाना था!  जब  टीवी नहीं थी मेरे हस्बैंड पूरा धयान रखते देते भरपूर समय और प्यार कई बार बजाते बैण्ड कर देते मुझे खुश हंँसा-हँसा कर समय बदला घर में टीवी आई मानो दूसरी बीवी आई अब तो हस्बैंड का भी बज  गया बैण्ड एक बार को तो हो गये परेशान किन्तु फिर पूरा ध्यान और समय देने लगे टीवी को अब क्या था मैंने अपना रूप संवारा टीवी ने भी अपना रूप संवारा पर उस डाइन के सामने एक न चली मेरी क्योंकि अब वो हो गई  ब्लैक एण्ड व्हाइट से रंगीन अब इस सौत का मेरे हस्बैंड पर हो गया पूरा अधिकार बैण्ड बजाना तो रहा दूर मेरी ओर देखते भी नहीं हाय!  सत्यानाश हो जाय इस डाइन का इसने तो मेरी खटिया खड़ी विस्तर गोल कर दिया

प्रेमियों को पैगाम

प्रेमियों को सदा फुर्सत रहती सबको लगा है काम बेचारे मिलते छुप- छुप कर  रहता  सदा डर कोई कर न दे बदनाम प्यार भी अजीब दर्द है जो कहा भी नहीं जाता सहा भी नहीं जाता मेले, मन्दिर, शादी व अन्य सामूहिक कार्यक्रम बहुत शुभ अवसर इनके मिलने के लिए  हो जाते हैं दर्शन दोनों को एक दूसरे के  बुझ जाती प्यास मिल लेते जी भर के समय भरपूर मिला इसलिए अगले कार्यक्रम की योजना बनाते मौके का फायदा उठाते पर याद रहता सदा  तितलियों और भौंरों का पैगाम जो भेजा है इनके नाम इशारों में बात कर लेना दर्द सह लेना दिल की बात दिल में रख लेना पर एक बात सदा याद रखना चलते फिरते रहना हमारी तरह मत बैठे रहना  एक ही जगह क्योंकि प्यार के दुशमनो ं को प्रेमियों का मिलना सहा नहीं  जाता मौका पाते ही कर देते हैं बदनाम

चुगल Chugal

रोज तुम्हारी गल मैं सुनता, आज तुम सुनों हमारी | मन कहता है लिख दूँ ऐसा, दूर हो व्यथा तुम्हारी || चुन-चुन कर गल तुम लाते, तनिक नहीं घबराते हो | स्वाद कहीं कड़ुवा नहीं हो जाय, सच में झूठ मिलाते हो || सच्चे लोगों की कमजोरी, झूठ नहीं सुन पाते हैं | फलस्वरूप सच्ची ख़बरों से ,वे वंचित रह जाते हैं || सुनने वाले  के मन को भाँप, तुम बातें खूब बनाते हो|| उसको होता बोर देखकर, नई  कथा  सुनाते  हो  || घर आए की इज्जत करना, यह संस्कृति हमारी है | इसका फ़ायदा खूब उठाकर, चलती बात तुम्हारी है|| अच्छों-अच्छों को पीछे छोड़, तुम अपना काम बनाते हो | बात करने की कला है तुममें, उसका लाभ उठाते हो || न्यूज़, मनोरंजन दो चैनल तुम्हारे, इनसे आदर मिलता है | पता नहीं कब क्या कुछ कर दो, हर कोई तुमसे डरता है || भय है तुम्हारा इतना की सब, हाँ में हाँ मिलाते हैं | ऐसे वैसे की बात नहीं, बड़े -बड़े हिल जाते हैं  || बनता काम विगाड़ो तुम ही, विगड़ा तुम्हीं बनाते हो | इसीलिए कहीं गाली मिलती, और कहीं पूजे जाते हो  || सही को गलत समझ लेना, लोगों की आदत पुरानी है | भला बताओ इस दुनिया में, तुमसे ...

डा० भीमराव अम्बेडकर

भारत रत्न से सम्मानित, संघर्ष किया असीम  | विधिवेत्ता, दलित मसीहा, तेरी जय जय भीम  || चौदह अप्रैल 1891 को, महू में जनमें आप   | भीमाबाई सकपाल माँ,  और राम जी   बाप  || बड़ौदा नरेश ने शिक्षा हेतु, छात्रवृत्ति की  प्रदान | बैरिस्टर बन देश का  , खूब किया  कल्यान  || संविधान के चक्र के  , सदा आप रहे  अक्ष  | आरक्षण की बात कही, दलितों का लिया पक्ष || दलितों का भी सिर ऊँचा हो, होय छुआछूत दूर | भीमराव अम्बेडकर जी ने, संघर्ष किया भरपूर  || दलित और दीन-दुखियों से, रहा आपका प्यार  | स्वतंत्रता और समानता रहे, आपके दर्शन के आधार ||   भारत के इतिहास में सदा, अमर रहेगा नाम  | भीमराव अम्बेडकर जी ने, किये है ं ऐसे काम ||   

ब्यूटी Beauty

बाई चान्स एक लड़के का किसी सुन्दर लड़की से हो गया प्यार प्रतिदिन दोनों में होती ं मीठी मीठी बातें काफी समय बीत गया लड़की ने देखा रोजाना विश इसके अलावा न कभी रोमांस और न कभी किस सोचा  किसी अनाड़ी से तो पल्ला नहीं पड़ गया परेशान होकर एक दिन बोली इस गति से मंजिल तक पहुँचने में कितने वर्ष लगेंगे?  लड़के ने उत्तर दिया किसी विद्वान ने कहा है ब्यूटी इज आनली सी नाट फार टच  ! 

लिंगानुपात असंतुलन

सृष्टि के प्रारंभ में श्रृद्धा और मनु अवतरित हुए सोचिए क्या कारण रहा होगा इसके पीछे शायद यही न कि दोनों पूरक थे एक दूसरे के जीवन अधूरा रहता  दोनों का एक दूसरे के अभाव में वर्तमान समय में समाज में कन्या भ्रूण हत्या से हो रहा असंतुलन स्त्री पुरुष अनुपात में भविष्य क्या होगा सोचा है किसी ने क्या स्त्री के बिना चल पाएगी सृष्टि बिना स्त्री के  रह पाएगा पुरुष कैसा होगा जीवन स्त्री के अभाव में अत: न करें लड़का लड़की में भेद इससे होगा संतुलित समाज एवं राष्ट्र

शेर-शायरी

अगर जिंदगी को तुम बनाना चाहते बेहतर | सदा आशा रखो मन में गुजारो हर समय हँसकर || कामयाबी की दुनियाँ में वे ही कदम रखते हैं | जो हर काम मन लगाकर किया करते हैं  || दुखों को झेल कर ही सुख मिला करते हैं  | गुलाब के फूल सदा काटों में खिला करते हैं || जिंदगी दुखों से भरी प्यार जीने का सहारा है | कोई इसे न समझे तो क्या दोष हमारा है || दुखों के दरिया को हिम्मत की किश्ती से पार करना | इस वेरहम दुनियाँ से दुख का इज़हार मत करना  || सुख में सब साथ देते हैं दुख में कौन देता है | बक्त आने पर अपना साया भी साथ छोड़ देता है || बड़ा हैरान हूँ मैं कि कौन अपना पराया है | जिनको अपना समझा था उन्हीं ने जुल्म ढाया है || बक्त गुजर जाएगा यादें आएंगी अपने परायों की | किसने खंजर भोंका किसने मरहम लगाया था || ऐ प्रेम के प्यासे तू रहना जरा संँभल कर | यह वो गर्म दूध है जो पिया भी नहीं जाता उगला भी नहीं जाता || मोहब्बत वो रास्ता है जिसमें कांँटे ही काँटे है ं | इस पर चलने वाले सदा मीठी ही सज़ा पाते हैं || बहुत हैरान मैं उनसे मुझे जो बिगड़ा कहते हैं | कुदरत की हर चीज विगड़ कर ही बना करती है || हम से अ...

गरीबी poverty

गरीबी क्या है?  एक विचारणीय प्रश्न सामान्यतः जब किसी व्यक्ति के जीवन में अभाव झलकता हो उसका खानपान रहन-सहन स्वास्थ्य वेशभूषा परिवेश दयनीय हो ं है ं गरीबी के लक्षण इसके मुख्य कारण अशिक्षा तकनीकी शिक्षा का अभाव अकर्मण्यता बेरोजगारी अनुचित आर्थिक नीतियांँ प्राकृतिक साधनों का दुरूपयोग आदि गरीबी को  देखना आसान किन्तु सहना कठिन अत: इसको  दूर करने हेतु किये जायें प्रयास रोजगार परक शिक्षा हो प्राकृतिक संसाधनों का दोहन हो कर्म को महत्व दें आलस्य न आने दें जीवन में जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण हो इन सब उपायों से  गरीबी होगी दूर विकास होगा समुचित राष्ट्र होगा विकसित

सामंजस्य Adjustment

  परिवर्तन आवश्यक नियम प्रकृति का समय के साथ बदलतीं परिस्थितियां लोगों के विचार व्यवहार सामाजिक मूल्य एवं मान्यताएं अतएव जीवन शैली में परिवर्तन लाना  हो जाता आवश्यक किन्तु रूढ़ियां जकड़े रहती मानव को परिवर्तन लाना हो जाता कठिन अब केवल विकल्प रहता तालमेल बैठाने का इसलिए सामंजस्य आवश्यक गुण व्यक्ति के जीवन का इससे बाधाएं हो जाएं कम जीवन हो सरल एवं सुखमय