मन - एक राजा MAN- EK RAJA
वर्तमान समय में दुनिया के अधिकांश देशों में लोकतंत्र है। पहले जब दुनिया के अधिकतर देशों में राजतंत्र था तब साहित्य में भी राजा रानी के किस्से कहानी बहुतायत में पढ़ने को मिल जाते थे। साहित्य समाज का दर्पण होता है। अब पहले के राजाओं की कहानियाँ ही पढ़ने को मिलती हैं। इस लेख में हम जिस राजा के बारे में जो कुछ भी कहने सुनने जा रहे हैं वो कोई ऐसा वैसा राजा नहीं है। इस राजा के बारे में ज्ञानी जनों के द्वारा बहुत कुछ कहा गया है। मैंने भी इस राजा को जैसा समझा है मैं अपने विचार व्यक्त कर रहा हूँ। हम जब भी कोई काम करते हैं तो पहले उसके बारे में सोच विचार करते हैं। काम शुरू करने से पहले हमें मानसिक रूप से तैयार होना पड़ता है अर्थात काम करने के लिए मन की स्वीकृति आवश्यक है। मन के विरुद्ध काम करने का साहस किसी में नहीं होता है। मन की गति की गणना कोई नहीं कर पाया है। मन बहुत तेज गति से चलता है। मन का स्वभाव चंचल है और अडिग भी। यह जहाँ टिक...