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मतलब की दुनिया # MATALAB KI DUNIYA # BLOG

'दुनिया मतलब की है।'इस कहावत ने मतलब शब्द को इतना बदनाम कर दिया है कि मतलब के बारे कुछ लिखने से पहले सोचना पड़ रहा है कि कहीं लोग मुझे मतलबी न समझ बैठें। सोचा जाय तो हर इंसान मतलबी होता है। किसी को मतलबी कहने पर न जाने उसे गाली क्यों लगती है। हो सकता है हम सब मतलब का भी गलत मतलब निकाल लिए हों।           वैसे तो हर किसी बात का कोई न कोई मतलब होता है और बिना मतलब की कोई बात नहीं होती है। जब हम किसी संदर्भ से हटकर बात करने लगते हैं तो वो बेमतलब की बात हो जाती है। ऐसी बात को सुनने वाला कोई महत्व नहीं देता है। वही बात ठीक लगती है जो कहने वाले और सुनने वाले दोनों के मतलब की हो। केवल अपने मतलब की बात करने वाले को मतलबी कहा जाता है।         जब हम किसी से बात करते हैं और वो हमारी बात का अर्थ नहीं समझ पाता है तब हम मतलब कहकर दूसरे सरल शब्दों में अपनी बात समझाने का प्रयास करते हैं, ऐसा अक्सर होता है। कुछ लोगों की तो आदत ही ऐसी हो जाती है कि वे अपनी हर बात में मतलब जोड़ देते हैं। जो इंसान बिना मतलब के अपनी बात नहीं कह पा रहा है उसे आप क्या कहें...