गैर बने अपने GAIR BANE APNE
समय के साथ साथ हमारे जीवन में बदलाव होता रहता है। परिस्थितियां बदलती हैं तो हमारी विचाधारा भी बदल जाती है। जो व्यक्ति हमें बुरा लगता था परिस्थितियों वश वही व्यक्ति हमें अच्छा लगने लगता है। जिंदगी भी अजीब है इसमें कब कौन सा मोड़ आ जाये निश्चित रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता है। इस संघर्षपूर्ण जीवन में मनुष्य जीवन पथ के मोड़ों से गुजरते हुए आगे बढ़ता रहता है। यही जिंदगी है। एक आम आदमी के मन में अपने-पराये, मित्र-शत्रु की सोच होती ही है लेकिन जिस इंसान का आत्मिक विकास हो गया हो या यूँ कहें जिसमें समता का भाव आ गया हो उसके लिए तो सभी अपने होते हैं कोई पराया नहीं होता है। ऐसा इंसान अपने जीवन में सदा सुखी रहता है । लेकिन ऐसे इंसान समाज में बहुत कम होते हैं। इस लेख में हम यह समझने का प्रयास करेंगे कि किन कारणों से गैर भी अपने बन जाते हैं और उनका हमारे प्रति पहले से अच्छा बर्ताव हो जाता है। आज के इस भौतिकवादी युग में हर भलाई बुराई की जड़ पैसा है। जहाँ आदमी...