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आप भला तो जग भला AAP BHALAA TO JAG BHALAA

समाज में अनेक प्रकार के लोग होते हैं। उन सबको समझ पाना और उनके बारे में कुछ कह पाना बड़ा ही मुश्किल कार्य है। उसका कारण यह है कि किसी एक ही विषय पर लोग एक मत नहीं हो पाते हैं, सबकी सोच और सबके विचार अलग -अलग होते हैं। फिर समाज में इतने अधिक लोग और उनके अनेक प्रकार के विचारों को समझना नामुमकिन है।            विषय को समझने की दृष्टि से समाज के सभी लोगों को तीन श्रेणियों में विभाजित कर लिया है । पहली श्रेणी में वे लोग आते हैं जो अपने जीवन में सदा दूसरों की भलाई के लिए कार्य करते हैं। ये लोग तन, मन और धन से सदैव दूसरों का हित करते हैं। ये संत स्वभाव के लोग होते हैं। ऐसा कहा गया है--परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर। इनकी संख्या समाज में कम होती है।            दूसरी श्रेणी में ऐसे लोग आते हैं जो अपने जीवन में अपना हित करने के साथ -साथ दूसरों का हित भी चाहते हैं। इनका विचार होता है कि हमारा अहित न हो, यदि किसी का भला हो जा रहा है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। इस प्रकार की सोच वाले लोग सज्जन कहलाते हैं। समाज में इस प्रकार के लोग काफी संख्...

सफलता प्राप्ति में धैर्य और समय का महत्व SAFALTAA PRAAPTI MEIN DHAIRYA AUR SAMAY KA MAHATV

जब हम किसी लक्ष्य में सफलता प्राप्त करने की बात करते हैं तो हर कोई सबसे पहले मेहनत को वरीयता देता है। बात भी सही है, बिना मेहनत किये कोई भी सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती है। यदि कोई व्यक्ति अपने काम में असफल हो जाता है तो एक सामान्य व्यक्ति भी बिना सोचे समझे सीधी सादी सबके द्वारा कही गई बात को कह देता है  'मेहनत नही ं की तो सफलता कैसे मिलती '।              'परिश्रम सफलता की कुंजी है'। यह कथन सर्वथा सत्य है, इसे नकारा नहीं जा सकता है। मैंने अपने जीवन में अनेक लोग ऐसे भी देखे हैं, जहाँ तक मेरी जानकारी है उन्होंने अपने काम में भरपूर मेहनत की। मेहनत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। बेचारे इसी आशा में रहते कि सफलता का स्वाद उन्हें भी चखने को मिल जाए किन्तु उनके मुंह में सफलता का स्वाद चखने के लिए आयी लार ज्यों की त्यो ं रह जाती।               लोग कहते हैं -'धैर्य का फल मीठा होता है'। अक्सर लोग मतलब की बात समझ लेते हैं किंतु बात का मतलब या तो समझने की कोशिश नहीं करते या उनकी समझ में नहीं आता है। संघर्ष क...