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दहेज प्रथा - Poem on Dowry In Hindi

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माता - पिता ने  अपनी कन्या को  विवाह के अवसर  पर  नव दाम्पत्य जीवन को  सुचारू रूप से  चलाने हेतु  अपनी इच्छा एवं सामर्थ्य अनुसार  प्रेमपूर्वक  दान स्वरुप  आवश्यक वस्तुएँ आदि  प्रदान कीं  कालान्तर में  यह प्रथा बनी  विकृत रूप हुआ  दहेज प्रथा के रूप में |  वर पक्ष द्वारा  कन्या पक्ष से  विवाह हेतु शर्त रखी गई  एक लम्बी सूची दहेज की  कन्या के रूप गुण आदि  गौण हुए  मुख्य हुई  बड़ी धनराशि एवं कीमती वस्तुएँ  परिणाम स्वरूप  इस कुप्रथा से  बढ़ी ऋणग्रस्तता  बेमेल विवाह हुआ  सम्बन्ध टूटे  कन्याओं ने की आत्म हत्याएं  जीवन हुआ तनावपूर्ण  भ्रटाचार बढ़ा  दहेज प्रथा कारण बना  कन्या भ्रूड़ हत्या का  लिंगानुपात में आया असन्तुलन  इससे पनपेंगी और भी अनेक  समस्याएं  अतः सभी का हो कर्तव्य  विरोध करें इस कुप्रथा का  इस कुप्रथा के न होने पर  होंगे सम्बन्ध मधुर  खुशहाली आयेगी जीवन में  समाज होगा संगठित ...

वृक्ष हमें कितने फल दाता

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जीवों को जीवित रहने को, रोग भगा स्वस्थ रहने को, प्रदूषण को कम करने को  वृक्षों से ऑक्सीजन मिल जाता |  वृक्ष हमें कितने फल दाता ||  सूरज जब अग्नि बरसाये, सब जीवों को धूप सताये, धूप में विल्कुल रहा न जाये  वृक्ष ही हमको छाया देता |  वृक्ष हमें कितने फल दाता ||  वर्षा सर्दी और धूप से, शिकारी और हिंसक मानव से, तेज ध्वनि के प्रदूषण से  पशुओं को जंगल ही बचाता |  वृक्ष हमें कितने फल दाता ||  सर्दी से अपने को बचाने, भाँति - भाँति के भोजन पकाने, फर्नीचर और मकान बनाने  हेतु लकड़ी, ईंधन मिल जाता |  वृक्ष हमें कितने फल दाता ||  देवालय में पूजा करने को, घर आँगन में खुशबू भरने को, ब्रत में फलाहार करने को  फल और फूल मिल जाता |  वृक्ष हमें कितने फल दाता ||  जंगल में जब घास की कमी हो, पशुओं को भी भूख लगी हो, वृक्षों से ही चारा मिलता हो  ऐसे समय बाँज  याद आता |   वृक्ष हमें कितने फल दाता ||  मिट्टी को काटने से बचायें, पत्तियां सड़कर खाद बनायें, भूमि को उपजाऊ बनायें  कृषि विकास सम्भब हो पाता |  वृक्...