समाज में परिवर्तन | Change in Society | Blog
परिवर्तन प्रकृति का आवश्यक नियम है. प्रकृति में सदा कोई न कोई परिवर्तन होता ही रहता है. कोई भी परिवर्तन यकायक नहीं हो जाता है वरन् इसमें काफी समय लग जाता है. परिवर्तन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. कुछ परिवर्तन कम समय में हो जाते हैं जबकि कुछ परिवर्तनों में तो बहुत अधिक समय लग जाता है. प्रकृति की तरह ही मानव जीवन में भी परिवर्तन होता है. जिस प्रकार ऋतुओं में जाड़ा, गर्मी और बरसात आती है उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में भी बचपन, जवानी और फिर बुढ़ापा आ जाता है. मनुष्य के जीवन के तरह ही समाज में भी परिवर्तन होता है, इसे सामाजिक परिवर्तन कहा जाता है. कोई भी सामाजिक व्यवस्था जो समाज में काफ़ी समय से चली आ रही है उसे गलत तो नहीं कहा जा सकता है. इसके बारे में इतना ही कहा जा सकता है कि प्रचलित सामाजिक व्यवस्था समयानुकूल नहीं है, इसमें सुधार की आवश्यकता है. वर्तमान भारतीय समाज में महिला सशक्तिकरण इस ओर एक सराहनीय कदम है. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ , सरकार की एक अच्छी योजना है. समाज में लिंगानुपात में असंतुलन एक गंभीर समस्या है. समय पर इसपर ध्यान नही ं दिया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सक...