गुब्बारे का गुबार POEM ON BALLOON IN HINDI



रंग रूप का हूँ मैं प्यारा
बच्चों की आँखों का तारा

हीलियम गैस मुझे सुहाती
आसमान की सैर कराती

बात बताऊँ तुमको हंँसके
पकड़े रहना मुझको कसके

छूट गया फिर हाथ न आऊंँ
आसमान में मैं उड़ जाऊँ

बच्चों के साथ मैं भी खेलता
इधर उधर मैं उड़ता फिरता

बच्चे मेरा ख्याल बहुत रखते
दूसरों को तभी छूने नहीं देते

फूटने से वो मुझे बचाते
फूट गया तो वो रो जाते

बच्चे मुझको लगते अच्छे
होते हैं वो मन के सच्चे

बच्चों का जन्मदिन जब आता
मैं भी खुशियाँ   खूब मनाता

सदा दोस्ती तुमसे मैं रखता
इसलिए एक शिकायत करता

मुझे फोड़कर खुशी मनाते
बिल्कुल न तुम हो पछताते

मैं मतलब का दोस्त तुम्हारा
जान गया अब यह जग सारा


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