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कुछ रंग दुनिया के Kuchh Rang Duniya Ke

कुछ कहना और कुछ करना दुनिया की यही कहानी है मन के अन्दर मैल भरा पर मीठी बहुत जुबानी है वादा करता जो कल का वो लम्बा समय बिताता है उधार ले गए सामान को वो जल्दी नही ं लौटाता है दिया हुआ सामान न मांगा फिर वापस नहीं आता है बहुत दिनों के बाद जो मांगा कितनी बात बताता है किसी से सम्बन्ध बिगाड़ो तो उसको पैसे देना तुम जिस दिन तुमने मांग लिए उसके दुश्मन बन गए तुम आपस की राम राम भी फिर बन्द हो जाती है उसको तुम्हारी सूरत भी बिल्कुल नहीं भाती है मतलब से ही प्रीत है जुड़ती बिन मतलब नहीं होती है बिन मतलब के राम राम भी आज बहुत कम होती है पैसे के पीछे भागा आदमी उसे रिश्ता नहीं दिखता है पैसे के खातिर गलत काम करने में नहीं हिचकता है जिससे उसका काम निकलता वो उसका अपना होता बिना काम के असली रिश्ता भी उसको नकली होता करें बहाना समय नहीं था काम पड़ा तो कहाँ से आया मतलब खातिर दौड़ लगाई खाना पीना कुछ नहीं भाया मीठा बोलकर काम निकालना लोगों को खूब आता है काम निकल जाने के बाद वही आदमी नहीं भाता है दूसरों का दर्द न समझे ं अपना दर्द गिनाते हैं किसी को दिल का दर्द बता दो खूब हंसी बनाते हैं अपना नुकसान इन्हें ...

ग़ज़ल Gazal

हम जियें तो दूसरों के लिए और मरें तो दूसरों के लिए रास्ता जब भी हो मुश्किल हम चलें तो दूसरों के लिए जब भी दुख हो किसी को भी हम रोये ं तो दूसरों के लिए माहौल जब भी खुशी का हो हम हंसें तो दूसरों के लिए जिंदगी में जो भी किया हमने वो रहे तो दूसरों के लिए

दिवाली फिर आई Diwali fir Aaee

वर्षा ऋतु का अन्त हुआ जब आना जाना सरल हुआ तब इधर उधर जब देखा जाकर गन्दे दिए दिखाई सब घर घरों की सबने करी पुताई दिवाली फिर आई विजनेस मैन दुआ मनाये ंं दीपावली जल्दी से आये दूकानों को खूब सजाकर  ज्यादा सा सामान बेचकर  हम भी कर लें खूब कमाई दिवाली फिर आई कुछ शौकीन जुआ के भाई उनने अपनी किस्मत अजमाई कहें जुआ खेले दिलवाला कुछ का तो हो गया दिवाला इस बार लक्ष्मी हुईं पराई दिवाली फिर आई तरह तरह के पकवान बनाये सबने मिलकर खूब है ं खाये पूड़ी, गुजिया और कचौड़ी कुछ को रुचिकर लगीं पकौड़ी पीने वालों ने नहीं खाई मिठाई दिवाली फिर आई फोड़े ं पटाखे मौज मनाये ं प्रदूषण को बहुत बढ़ाये ं  खतरा इनसे होता भारी बच्चों की मति गयी है मारी दुर्घटना हो सकती भाई दिवाली फिर आई जगमग जगमग दीप जल रहे तारों जैसे ये खिल रहे अवली इनकी दिखतीं प्यारी सुन्दर लगती ं न्यारी न्यारी लगता उजियारा ले आईं दिवाली फिर आई श्रीराम वनवास से आये सीता, लखन साथ में आये अयोध्यावासी खुशी न समाये सबने घी के दीप जलाये तब से प्रतिवर्ष दिवाली मनाई दिवाली फिर आई

ग़ज़ल GAZAL

मैं जो कहता हूँ उसे निभाता हूँ मेरे मन में जो है उसे सुनाता हूँ कविता भले ही हो कल्पना मेरी फिर भी मैं सच के करीब जाता हूँ चाहे लोग कुछ भी समझें मुझको पर मैं कहने में न हिचकिचाता हूँ देखता हूँ जब भी कुदरत की रचना को न जाने क्यों  मन ही मन मुस्कराता हूँ सबको समझ लिया है अब अपना मैंने तब ही तो हर किसी का गम बंटाता हूँ

क्या अच्छा और क्या बुरा | Kya Achchha Aur Kya Bura

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दीना एक छोटे से गाँव में रहता था. गाँव छोटा तो था ही और इसमें सुख सुविधा नाम की कोई चीज नही ं थी. गाँव में रास्ते कच्चे ही थे. वर्षा ऋतु में तो गाँव में किसी के घर से किसी दूसरे के घर जाना भी बड़ा मुश्किल होता था. बाद में कुछ रास्तों में खड़ंजा पड़ गया था. गाँव में बिजली भी अभी नहीं आई थी. गाँव में एक शिव मंदिर और एक प्राइमरी स्कूल था. दीना की शिक्षा इसी प्राइमरी स्कूल में कक्षा पांच तक ही हो पाई. गरीबी के कारण उसके पिता शिक्षा के लिए उसे और कहीं नहीं भेज पाए थे. दीना के पिता कृषि कार्य करते थे. दीना भी अपने पिता के कार्य में हाथ बंटाता था. दीना अभी छोटा ही था किन्तु अपने पिता के खेत को जाते समय सदा उनके साथ जाता था. दीना के पिता  जिस दिन सुबह का नाश्ता  किए बिना ही खेत को चले जाते तो दीना ही नाश्ता लेकर खेत को जाता था. धीरे धीरे दीना कुछ बड़ा हो गया.अब रिश्तेदार दीना के पिता से दीना का विवाह करने को कहने लगे. रिश्तेदारों का ज्यादा दबाव पड़ने के कारण दीना का विवाह कम उम्र में ही कर दिया गया. दीना का विवाह एक धनदेई नाम की अनपढ़ लड़की से हुआ. इसका कारण यह रहा कि उस समय लड़क...

सिमटती धरती- बढ़ती दूरियां | Simatee Dhartee-Barhtee Dooriyaan

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भारत एक कृषि प्रधान देश है. यहाँ की लगभग सत्तर प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य करती है.कृषि करने के लिए जमीन की आवश्यकता होती है. देश की जनसंख्या में निरंतर वृद्धि के कारण खेतों का आकार दिन प्रतिदिन छोटा होता जा रहा है. इसके अतिरिक्त बढ़ती जनसंख्या के लिए अन्य सुविधाओं हेतु भी भूमि का उपयोग किया जा रहा है इस कारण से कृषि योग्य भूमि दिनों दिन घटती जा रही है. इनमें प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं. बेरोजगारी वर्तमान समय की एक प्रमुख समस्या है. कृषि कार्य में लगे लोगों को भी वर्ष भर कार्य नहीं मिलता है. कृषि कार्य में कुछ लोग ऐसे भी लगे रहते कि जिनको हटा देने से भी उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. इस प्रकार के कार्य में लगे लोग भी बेरोजगार कहलाते हैं, इस प्रकार की बेरोजगारी  प्रछन्न बेेेरोजगारी कहलाती है. बेरोजगारी का एक अन्य प्रकार शिक्षित एवं प्रशिक्षित युवक एवं युवतियों का है.इन युवाओं के लिए भी रोजगार देने का दायित्व भी सरकार का ही बनता है. सरकार द्वारा जो रोजगार की व्यवस्था की जाती है वो बेरोजगारों की तुलना में काफी कम होती है. बेरोजगारी केवल सरकारी नौकरियों से दूर नहीं हो पा रही है,...

कुछ लोग ऐसे भी Kuchh Log Aise Bhi Hindi Poem

बन्दे तेरे धन्धे कैसे कुछ आज समझ नही ं आता है आए दिन कितना झूठ बोले  तू तनिक नहीं शर्माता है चिकनी चुपड़ी बातें करके तू सबको खूब लुभाता है अपना उल्लू सीधा करने को धोखे का जाल बिछाता है पल्ले में नहीं कुछ भी तेरे पर झूठी शान दिखाता है दूसरों से मांगी हुई चीज को अपनी चीज बताता है जाल में फँसे तेरे कोई चिड़िया फिर खूब तू हर्षाता है अगले कुछ दिनों का खर्चा आराम से चल जाता है ऐसा इंसान सुनो भाई जीवन में कुछ नहीं कर पाता है बस अपना और अपने कुल का नाम ही खूब डुबाता है

ग़ज़ल Gazal

मुझे छोड़ कर तुम कहाँ जा रहे हो कहो तो सही क्यों न कह पा रहे हो पूंँछा जो मैंने तो कुछ न बताया फिर मन ही मन क्यों मुस्करा रहे हो कितने दिनों से बैठा हूँ इसमें कि कब आ रहे और क्या ला रहे हो बड़े ही अजीब बन गए हो अब तुम जो भी लाए हो उसे खुद खा रहे हो न जाने क्या मैंने देखा है तुम में जो रुख न मिलाते फिर क्यों भा रहे हो 

ग़ज़ल Gazal

कोई न हो जब करीब तब तुम मिला करो छोड़ो वो पिछली बातें अब न गिला  करो देखो ये दुश्मनों ने कितने दिए हैं जख्म अब तुम ही आ करके इनको सिला करो आई जो तुम तो आ जाए बहार फिर मेरी भी कुछ बात तुम मान लिया करो पतझड़ करीब हो ये लगता है मुझको गम दूर रहे हमसे तुम ऐसी खिला करो मिलना हो जब हमें ये सोचे रहना तुम तुम सुई हो मैं धागा तुम न हिला करो                                              

बाल विवाह पर कविता Poem On Early Marriage In Hindi

लड़की और लड़के की उम्र हो इक्कीस वर्ष से कम विवाह हो सम्पन्न कहलाता है बाल विवाह माता पिता अपनी जिम्मेदारी से छुटकारा पाने हेतु अथवा लड़की, लड़के का व्यवहार देखकर बदनामी से बचने के लिए कर देते विवाह शीघ्र अपने किशोर अथवा किशोरी का मजबूरी वश कम उम्र में इस विवाह के कारण इनका जीवन हो जाता  अंधकारमय आता शिक्षा  में व्यवधान अपूर्ण शारीरिक विकास अपरिपक्व विचार कमजोर संतान अधिक संतानोत्पत्ति स्वास्थ्य में गिरावट निम्न जीवन स्तर गरीबी आदि आती ं समस्याएं जीवन में बाल विवाह सामाजिक कुप्रथा का विरोध करें इसके दोषों को समझाएं सभी को विद्यालयों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बाल विवाह के दोषों से संबंधित नाटकों का मंचन करवाये ं किशोर तथा किशोरियों की भावनाओं को उनके माता पिता समझे ंं मित्रवत व्यवहार करें उनसे कम उम्र में विवाह के दोष बताएं इस कुप्रथा के दूर होने पर होगा स्वस्थ समाज एवं विकसित राष्ट्र