आप भला तो जग भला AAP BHALAA TO JAG BHALAA
समाज में अनेक प्रकार के लोग होते हैं। उन सबको समझ पाना और उनके बारे में कुछ कह पाना बड़ा ही मुश्किल कार्य है। उसका कारण यह है कि किसी एक ही विषय पर लोग एक मत नहीं हो पाते हैं, सबकी सोच और सबके विचार अलग -अलग होते हैं। फिर समाज में इतने अधिक लोग और उनके अनेक प्रकार के विचारों को समझना नामुमकिन है। विषय को समझने की दृष्टि से समाज के सभी लोगों को तीन श्रेणियों में विभाजित कर लिया है । पहली श्रेणी में वे लोग आते हैं जो अपने जीवन में सदा दूसरों की भलाई के लिए कार्य करते हैं। ये लोग तन, मन और धन से सदैव दूसरों का हित करते हैं। ये संत स्वभाव के लोग होते हैं। ऐसा कहा गया है--परमारथ के कारने, साधुन धरा शरीर। इनकी संख्या समाज में कम होती है। दूसरी श्रेणी में ऐसे लोग आते हैं जो अपने जीवन में अपना हित करने के साथ -साथ दूसरों का हित भी चाहते हैं। इनका विचार होता है कि हमारा अहित न हो, यदि किसी का भला हो जा रहा है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। इस प्रकार की सोच वाले लोग सज्जन कहलाते हैं। समाज में इस प्रकार के लोग काफी संख्...