संदेश

मोबाइल Mobile phone

आओ मेरे पास बैठो, प्रिय मित्र मोबाइल | अपने दिल की बातें कह दूँ, चेहरे पर आए स्माइल || बिना तुम्हारे आज किसी को, चैन नहीं पड़ता है | छोटा बच्चा भी तो, मोबाइल के लिए लड़ता है || बच्चों के तुम बने खिलौना, बड़ो के जीवन साथी  | बूढ़ों के तुम बने सहारा, रहा कोई नहीं बाकी   || आल इन वन बनकर तुम आए, ऐसा रंग जमाया | घड़ी, रेडियो, टी वी छोड़कर, सबने तुमको अपनाया || दुनिया को एक करने का, तुमने फ़र्ज निभाया  | दूर से भी दूर व्यक्ति को, सबके निकट बैठाया || कलयुग के तुम बने देवता, घर घर पूजा होती  | चाहे पहने हों पैंट, पजामा, अथवा बांँधे हों धोती || समाजवाद के सच्चे उपासक, बनकर तुम आए हो | प्रिय मित्र मोबाइल तुम्हारी, जय हो, जय हो, जय हो ||                                                                                          

फुलवारी - FULWARI

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                                                                                   प्रातः काल जब मैं उठता,                   आंँगन मे दिखती फुलवारी  |   खुद तो बैठी मुझे घुमाती,                   आंँगन की ऐसी फुलवारी|   मैं नहाऊँ तो गोसल जाऊँ,                    वर्षा में नहाती फुलवारी |        नहाय धोयकर, सज संवर कर,                    आँगन में बैठी फुलवारी |        जब-जब हँसती और मुस्कराती,                    मुझको खुश करती फुलवारी | ...

श्री गांधी जयंती Shri Gandhi Jayanti

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सत्य,अहिंसा और प्रेम का, जिसने पाठ पढ़ाया | गरीब और दीन दुखियों को,जिसने गले लगाया | शरीर श्रम का महत्व जीवन में, जिसने हमको सिखलाया | बिना मेहनत किये भोजन करना, पाप जिसने बतलाया | सादा जीवन उच्च विचार को, जिसने जीवन में अपनाया | खादी और चरखा के बल पर, रोजगार जिसने दिलवाया | कर्म को ही पूजा कहकर, गीता का ज्ञान कराया | पथ से भ्रमित भारत  को, सही मार्ग दिखलाया | बिना युद्ध और हिंसा के, भारत आजाद कराया | ऐसे गांधीजी के जीवन से, हम सब शिक्षा पाये ं | आज जयंती के अवसर पर, उनको शीश नवायें |

कुर्सी दौड़ Race For Chair

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  कुर्सी लकड़ी की हो अथवा किसी धातु की कोई फर्क नहीं पड़ता खेल है कुर्सी पर बैठने का इस दौड़  में शामिल अनेक राजनैतिक दल दौड़ते कुर्सी के लिए कुर्सी राजनैतिक सत्ता की इन दलों के अपने-अपने चुनाव चिह्न सिद्धांत और विचारधारा लोकतंत्र इनका नारा जाते जनता के बीच वोट मांगने चुनाव के समय रात दिन कर देते एक करते झूठा चुनाव प्रचार भोली-भाली जनता को  करते गुमराह लालच देते जनता को लेते वोट धनवानों का धन निर्धनों की निर्धनता दूषित करते प्रजातंत्र को वोटों का करते ध्रुवीकरण जाति और धर्म के नाम पर चुनाव लड़ते नहीं जनता को आपस में लड़ाते सामान्य को समस्या समस्या को सामान्य बना देते राजनीति में सब जायज कहते सहारा लेते असमाजिक और अराजक तत्वों का चुनाव जीतने के बाद पांच साल आराम से कटते भूल जाते जनता को बात करते जनहित की करते निज हित दल बदल नीति गम्भीर बीमारी सत्ता का सुख भोगने हेतु शामिल हो जाते  सत्ताधारी पार्टी में भ्रष्टाचार एक प्रमुख समस्या योजनाओं का पूरा लाभ नहीं पहुंचता जनता तक नाम लोकतंत्र का किन्तु है 'लोभतंत्र'

शिक्षक Teacher

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हे शिक्षक !  तुम दीपक जलकर स्वयं देते दूसरों को प्रकाश स्वयं अंधरे में रहकर कर देते सारे जग को दीप्तिमान हे शिक्षक !  तुम हो महान जलना है तुम्हारा धर्म जब तेल तुम्हारा  हो ज्ञान शैली  हो तुम्हारी वाती फिर क्यों न जलो अविराम ?  हे शिक्षक  !  तुम हो महान न ऊंच नीच का भेद देते प्रकाश समान फैलाते सर्वत्र ज्ञान हे शिक्षक !  तुम हो महान 

टेंशन Tention

जीवन में टेंशन कैसे हो  इसका मेन्शन यह भी है एक टेंशन मात्र ऐसा सोचने से क्या कोई  हो पायेगा टेंशन फ्री अतैव  जरूरी है करना इसका मेन्शन बच्चों को मम्मी पापा की डांट फटकार का टेंशन पब्लिक स्कूल का भारी बैग लादने का टेंशन होमवर्क का टेंशन इक्जाम में हण्ड्रेड परसेंट मार्क्स लाने का टेंशन क्लासमेट से मिलने, विछुड़ने का टेंशन विचार ना मिलने पर लड़ाई-झगड़े का टेंशन पढ़ाई के बाद जाब मिलने का टेंशन पैसा कमाने और खर्च करने का टेंशन रिश्तों का टेंशन लोन लिया ह़ो तो किश्तों का टेंशन उधार देने और लेने का टेंशन कोई वस्तु ना हो तो टेंशन वस्तु होने पर और भी अधिक टेंशन वस्तुओं में मिलावट का टेंशन जीवन में दिखावट का टेंशन सोसाइटी में स्टेटस का टेंशन बृद्ध हुए तो स्वास्थ्य में गिरावट का टेंशन परिवार में बच्चों की खट्टी मीठी बातों का टेंशन अरे मेरे मित्र टेंशन क्या कब्र तक साथ रहने का विचार है  ! 

यूज एण्ड थ्रो Use And Throw

तकनीक के विकास से कम हुई वस्तुओं की लागत किन्तु कम हुआ टिकाऊपन भी परिवर्तन आया व्यक्ति की सोच  में सोचा पुरानी वस्तु को सुधरवाने से अच्छा नयी वस्तु को खरीदना इससे मनुष्य के जीवन में आया भौतिकवाद मनुष्य को मनुष्य से कम वस्तुओं से अधिक प्रेम हुआ सामाजिक मूल्यों में आया परिवर्तन सेवाभाव  हुआ कम परिणामस्वरूप व्यक्ति हुआ स्वार्थी एवं लालची धन ही  हो गया सबकुछ व्यक्ति रह गया यूज एण्ड थ्रो वस्तु बनकर

अनुभव experience

जीवन में निरन्तर चलने वाली प्रकिया है अनुभव इसका प्रारंभ होता जिज्ञासा से प्रयत्न भूल एवं सुधार आवश्यक अंग इसके एक ही कार्य को बार-बार करने से कार्य हो जाता सरल समय की होती बचत आती गुणवत्ता कार्य में परिणाम स्वरूप अनुभव प्राप्त व्यक्ति को काम मिल जाता शीघ्र अनुभव है ज्ञान का भण्डार आय का स्रोत एवं मानव जीवन के विकास का आधार

विविधा Vividha

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सदा प्रेम से तुम करो, सबसे वार्तालाप  | इससे समाज में बढे़, तुम्हारा मेल मिलाप || प्रेम तत्व सबसे बड़ा, इससे बड़ा न कोय | जो इसको समझे भला, क्यों न पंडित होय || को जाने किस बाल के, लिखो है कहा ललाट | जीवन में बन जाये कुछ, या रह जाय सपाट || माता-पिता चाहे भला, बालक करे विकास | ध्यान उस पर दें सदा, दूर हो या पास || जीवन में सफलता का, सबसे बड़ा है राज | काम को टालो नहीं, करो आज का आज || फिर फिर फिर तू क्या करे, फिर में तो है फेर | काम को पूरा कर अभी, बेर हो या अबेर  || ईश्वर सबका एक है, मानव में क्यों भेद | जात-पांत को देखकर, यही तो होता खेद || जो तू चाहे जगत में, तेरा हो सम्मान | तुझे न करना चाहिए, किसी का अपमान || चिंता चिता से बुरी है, तू चिंता कर नाय | चिता जरावै मरे को, यह तो जिंदा जराय || दुख में भी हंसते रहो, मत हो कभी उदास | जैसे कीचड़ में कमल, करता सदा विकास || कष्टों से तुम ना डरो, इनसे होय सुधार | ज्यों तपने के बाद ही, सोना पाय निखार || शीतल निर्मल जो बने, सबका प्रिय हो जाय | ज्यों पूनम के इन्दु को, देख सभी हरसाय || विनम्र जन तो विपत से, उसी भांति बच जाय | आंधी में कोम...

सामाजिक नीति Social Policy

 जो तू चाहे जगत में, तेरी फूले फुलवार | तो तुझको ना चाहिए, किसी से करना रार || जीवन में आते सदा, सुख दुःख दोनों तोय | जो चाहे अपना भला, दोनों में सम होय || जो तू चाहे जगत में, तेरा हो कल्यान | माता पिता और गुरू, सबका कहना मान || रक्षक ही जब हो भक्षक, तब हो कौन सहाय | फिर प्राणों के बचने का, नहीं कोई उपाय || जो तू चाहे जगत में, तेरा हो कुछ मोल | तो अपने ज्ञान चक्षु को, जल्दी लेना खोल || ज्ञानी होने का कभी, मत करना अभिमान | घट जायेगा जगत में, तेरा फिर सम्मान || मित्रों देखो जगत में, वह सुख से रह पाय | दूसरों की चीज को, देख न जो लुभयाय || दोस्ती और दुश्मनी, दूर से जो कर पाय | ऐसे व्यक्ति के जीवन में, कष्ट कभी न आय || संगत करना साधु की, दुर्जन का न साथ | पछतायेगा फिर कभी, माथे पै धर हाथ  || संगत का ऐसा असर, कभी न खाली जाय | जैसी संगत जाये तू, वैसा ही फल पाय || सज्जन तो बिगड़े नहीं, चाहे होय कुसंग | चन्दन पर विष ना चढ़े, लिपटें लाख भुजंग || दुष्ट न छोड़ें दुष्टता, लाख जतन कर कोय | ज्यों पकने के बाद भी, मिर्च न मीठी होय || दुर्जन से बचकर रहो, जो तुम चाहो खैर | इनसे भली न दोस्ती, और ...