क्रोध

Daftar Isi [Tutup]
    क्रोध कभी मत कीजिए , बुद्धि का करे नास ।
    बिन बुद्धि क्या कर सका , जग मेँ कोई विकास ।।
    क्रोध करना ठीक नहीँ , यह न किसी को भाय ।
    क्रोधी जन भी तो सदा , बाद मेँ है पछताय ।।
     जो तू चाहे जगत मेँ , सबका प्रिय हो जाय ।
    क्रोध त्यागने पर ही , ऐसा है कर पाय ।।
    शांति के बिना तो कभी , क्रोध न जीता जाय ।
    ज्योँ पानी डाले बिना , आग न बुझने पाय ।।
    रक्त चाप के रोग मेँ , क्रोध है बडा सहाय ।
    ज्योँ घी डाले आग का , जलना तेज हो जाय ।।
    आग भी नहिँ जला सके , जैसा क्रोध जलाय ।
    क्रोधी जन का तो सदा , तन दुबला हो जाय ।।
    क्रोध को सेवक रूप मेँ , जो कोई ला पाय ।
    उसके जीवन मेँ यही , अनेक काम बनाय ।।
    कमैंट्स